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बुद्ध धम्म मेरे लिये कौतुहुल और जिज्ञासा से कम नही है , जितना मैने इसे जानने का प्रयत्न्न किया उसमे उतना ही समाता ही चला गया । जहाँ एक ओर सारे मत , धर्म और मतावलम्बी अपने-२ उपासकों या अनाम ईशवर को महाँमडित करने का प्रयत्न्न करते हैं वही यह मत मन के कोने को छूते , झकझोरते और पूर्वग्रहों से मुक्त करता प्रतीत होता है । मेरी नजर मे बुद्ध एक चिकित्सक थे , शास्ता थे ,गुरु थे और अप्रमाद योगी थे । सारी मनुष्य जाति मे बुद्ध ने जितनी संभावनाओं को जन्म दिया , किसी दूसरे मनुष्य ने नही दिया । साधारण से दिखने वाले बुद्ध के वचन क्रांति के उदघोष हैं और यही कारण है बुद्ध के वचनों के साथ क्रांति की ऐसी आँधी आती है जो हमारी जड मान्यताओं को तोड जाती है और हमारे लिये छॊड जाती है हमारी शुद्द निजता , हमारा एकांत मन । मन से विदा हो जाती है सब भीड –भाड , समाज की भेड्चाल और प्रथम बार व्यक्ति जानता है व्यक्ति होना ।
नीरव ह्र्दय
नि:स्तब्ध मन
शून्य नयन
निरभ्र गगन
सहज ध्यान
Do not believe in anything (simply)
because you have heard it.
Do not believe in traditions because they
have been handed down for many generations.
Do not believe in anything because it is
spoken and rumoured by many.
Do not believe in anything (simply)because
it is found in your religious books.
Do not believe in anything merelely on the authority
of your teachers & elders.
But after observations & analysis,
when you find anything that agrees with reason
and is conducive to the good & benefit of one & all
then accept it & live upto it .
Buddha
( Angutra Nikaya , vol 1, 188-193 )
तुम किसी बात को केवल इसलिये मत स्वीकार करो कि यह अनुश्रुत है, केवल इसलिये मत स्वीकारो कि यह हमारे धर्मग्रंथ के अनूकूल है या यह तर्क सम्मत है , केअवल इसलिये मत स्वीकरो कि यह यह अनुमान सम्मत है , केवल इसलिये मत स्वीकारो कि इसके कारणॊं की सावधानी पूर्वक परीक्षा कर ली गई है , केवल इसलिये मत स्वीकरो कि इस पर हमने विचार कर अनुमोदन कर लिया है , केवल इसलिये मत स्वीकारो कि कहने वाले का व्यक्तित्व आकर्षक है, केवल इसलिये मत स्वीकारो कि कहने वाला श्रमण हमारा पूज्य है । जब तुम स्वानुभव से यह जानो कि यह बातें अकुशल हैं और इन बातों के चलने से अहित होता है , दुख होता है तब तुम उन बातों को छॊड दो !
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