Wednesday, June 10, 2009

अनगिनत इच्छायें – क्या इसका कोई अंत है !!

ऐशिया के कुछ देशो मे बन्दरों को पकडने का तरीका अभूतपूर्व है । बन्दर पकडने वले एक खाली नारियल का खोल लेते हैं , उसमे मीठा भरते हैं और नारियल के नीचे एक इतना बडा छॆद करते हैं जिसमे कि बन्दर का हाथ अन्दर चला जाये लेकिन बाहर न आ पाये । इसके बाद वह नारियल पेड पर रख दिया जाता है ; बंदर नारियल लेने के लिये आता है और फ़ँस के रह जाता है । लेकिन कभी आपने सोचा कि बदर को कौन सी चीज फ़ँसा देती है , सिर्फ़ एक और वह है उसका लालच और प्रलोभन ।  सिर्फ़ बन्दर को अपना हाथ से मीठाई को छोडना भर है , हाथ को ढीला करना है और बस हाथ आसानी से बाहर निकल आयेगा ।  लेकिन कुछ होशियार बदर इससे आसानी से मुक्ति भी पा जाते हैं ।

यही तो हम अपनी असली  जिदंगी मे करते हैं , अनगिनत इच्छाओं को पकडॆ रहते हैं और छोडने का जरा सा भी साहस नही कर पाते । लेकिन कुछ साहसिक लोग कर भी लेते हैं , mindfullness mediatation की यही विशेषता है कि वह उन बाधाओं का दर्शन करती है जिससे हमे दूर रहना है ।

 

In Asia there is a very clever trap for catching monkeys. People hollow out a coconut, put something sweet in it, and make a hole at the bottom of the coconut just big enough for the monkey to slide its open hand in, but not big enough for the monkey to withdraw its hand as a fist. They attach the coconut to the tree, and the monkey comes along and gets trapped. What keeps the monkey trapped? Only the force of desire, of clinging, of attachment. All the monkey has to do is let go of the sweet, open its hand, slip it out, and be free. But only a very rare monkey will do that. 

~  Joseph Goldstein, Transforming the Mind, Healing the World

3 comments:

  1. wow, so monkeys crave also!

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  2. बहुत सुंदर उदाहरण दिया आप ने काश हम भी बंदर ना बने तो हम सभी सुखी रह सकते है, बस यह छोटी सी बात समझ मै आनी चाहिये.
    धन्यवाद

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  3. Great blog. May Buddha bless you for helping to spread the Dharma and his Teachings to the world.

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