(Dealing with Disease)
बीमारी कोई दंड नहीं है —
यह प्रकृति का नियम है।
जिस शरीर का जन्म हुआ है,
उसका बीमार होना स्वाभाविक है।
दर्द शरीर में होता है,
दुःख मन की प्रतिक्रिया से जन्म लेता है।
जब हम डर, घृणा और शिकायत को
सिर्फ़ देखना सीख लेते हैं,
तो दर्द बना रहता है
पर दुःख कम हो जाता है।
इलाज आवश्यक है,
पर उससे आसक्ति नहीं।
बीमारी भी
जागरूकता और बोध का
मार्ग बन सकती है।
“मैं बीमार हूँ” नहीं —
“बीमारी को जाना जा रहा है”
यही मुक्तिदायक दृष्टि है।
— अजहन सुमेधो
🕊️ © drprabhattandon
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