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Thursday, March 28, 2024

जेन स्टोरी : टूटा हुआ कप

 जेन स्टोरी



चीन के एक बौद्ध भिक्षु को उनके एक शिष्य ने बहुत ही सुन्दर क्रिस्टल कप उपहार दिया , वह उस शिष्य का बहुत आभारी था। वह उस क्रिस्टल कप से हमेशा चाय पीता रहता है , वह इस क्रिस्टल कप को हर आने - जाने को दिखता है और उन्हें अपने छात्र के बारे में बताया करता ,
हर सुबह, वह बौद्ध भिक्षु कुछ सेकंड के लिए कप अपने हाथ में लेकर खुद से कहता " यह कप पहले ही टूट गया है "
एक दिन , एक मिलने वाले ने उस कप को शेल्फ पर रखा , वह ज़मीन पर गिर कर टूट गया , मिलने वाला सदमे में आ गया ,लेकिन बौद्ध भिक्षु शांत रहे और उन्होंने कहा " इस गंदगी को देखो " और झाड़ू उठा कर साफ़ करने लगे और कहा कुछ भी लम्बे समय तक नहीं रहता , सब कुछ बदलता है , सब कुछ टूटता है ।

Tuesday, July 26, 2016

बॉस की तरह बनो

ज़ेन गुरु जंगल की पथरीली ढलान पर अपने एक शिष्य के साथ कहीं जा रहे थे. शिष्य का पैर फिसल गया और वह लुढ़कने लगा. वह ढलान के किनारे से खाई में गिर ही जाता लेकिन उसके हाथ में बांस का एक छोटा वृक्ष आ गया और उसने उसे मजबूती से पकड़ लिया. बांस पूरी तरह से मुड़ गया लेकिन न तो जमीन से उखड़ा और न ही टूटा. शिष्य ने उसे मजबूती से थाम रखा था और ढलान पर से गुरु ने भी मदद का हाथ बढाया. वह सकुशल पुनः मार्ग पर आ गया.

आगे बढ़ते समय गुरु ने शिष्य से पूछा, “तुमने देखा, गिरते समय तुमने बांस को पकड़ लिया था. वह बांस पूरा मुड़ गया लेकिन फिर भी उसने तुम्हें सहारा दिया और तुम बच गए.”

‘हाँ”, शिष्य ने कहा.

गुरु ने बांस के एक वृक्ष को पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा और कहा, “बांस की भांति बनो”. फिर उन्होंने बांस को छोड़ दिया और वह लचककर अपनी जगह लौट गया.

“बलशाली हवाएं बांसों के झुरमुट को पछाडती हैं लेकिन यह आगे-पीछे डोलता हुआ मजबूती से धरती में जमा रहता है और सूर्य की ओर बढ़ता है. वही इसका लक्ष्य है, वही इसकी गति है. इसमें ही उसकी मुक्ति है. तुम्हें भी जीवन में कई बार लगा होगा कि तुम अब टूटे, तब टूटे. ऐसे कई अवसर आये होंगे जब तुम्हें यह लगने लगा होगा कि अब तुम एक कदम भी आगे नहीं जा सकते… अब जीना व्यर्थ है”.

“जी, ऐसा कई बार हुआ है”, शिष्य बोला.

“ऐसा तुम्हें फिर कभी लगे तो इस बांस की भांति पूरा झुक जाना, लेकिन टूटना नहीं. यह हर तनाव को झेल जाता है, बल्कि यह उसे स्वयं में अवशोषित कर लेता है और उसकी शक्ति का संचार करके पुनः अपनी मूल अवस्था पर लौट जाता है.”

“जीवन को भी इतना ही लचीला होना चाहिए.”

साभार : हिंदी जेन