Tuesday, August 6, 2013

अप्प दीपो भवो !!

अप्प द्धीप भवो

अप्प दीपो भवो

एक सूत्र की व्याख्या-गहन, गंभीर, अति विस्तीर्ण, अति महत्वपूर्ण ! यह बुद्ध का अंतिम वचन था इस पृथ्वी पर। शरीर छोड़ने के पहले यह उन्होंने सार-सूत्र कहा था। जैसे सारे जीवन की संपदा को, सारे जीवन के अनुभव को इस एक छोटे-से सूत्र में समाहित कर दिया था। भगवान गौतम बुद्ध ने अपने प्रिय शिष्य आनन्द से उसके यह पूछने पर की जब सत्य का मार्ग दिखने के लिए आप या कोई आप जैसा पृथ्वी पर नहीं होगा तब हम कैसे अपने जीवन को दिशा दे सकेंगे तो बुद्ध ने उत्तर दिया  - "अप्प दीपो भव" अर्थात अपना दीपक स्वयं बनो । कोई भी किसी के पथ के लिए सदेव मार्ग प्रशस्त नहीं  कर सकता केवल आत्मज्ञान और अंतरात्मा के प्रकाश से ही हम सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।

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