तवांग के प्रचीन मठों में से एक उर्गेलिंग मठ तवांग शहर से 3 किमी दूर स्थित है। इसके बारे में कहा जाता है कि इसका अस्तित्व 14वीं शताब्दी से है। इस मठ का निर्माण उर्गेन संगपो द्वारा किया गया था और यह भी माना जाता है कि यह मठ उनके द्वारा बनवाए गए पहले तीन मठों में एक है। एक मान्यता यह भी है कि 1683 में जन्मे छठे दलाई लामा त्सांगग्यांग ग्यामत्सो का जन्म स्थल भी है। वह लामा ताशी तेंजिन के बेटे और तेर्टन परमालिंगपा के वंश के थे।
Wednesday, March 8, 2017
Monday, June 15, 2015
चीन में हजार हाथों वाली बुद्ध प्रतिमा का जीर्णोद्धार
बीजिंग। चीन के विशेषज्ञों ने बुद्ध की आठ सौ साल पुरानी प्रतिमा का जीर्णोद्धार कर दिया है। अपने हजार हाथों के लिए प्रसिद्ध यह प्रतिमा देश के दक्षिण-पश्चिम प्रांत में स्थित है। जीर्णोद्धार के काम में सात वर्ष का समय लगा।
शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, अब पर्यटक हजार हाथों वाली प्रतिमा ‘कियानशू गुआनयिन’ को नए रूप में देख सकते हैं। इससे पहले भी चार बार इस प्रतिमा की मरम्मत हो चुकी है। कामगारों ने सोने के 10 लाख पत्तरों और 227 उपकरणों का इस्तेमाल कर 830 हाथों को फिर से बना दिया। प्रतिमा को पूरी तरह से साफ भी किया गया।
सांस्कृतिक विरासत के अनुसंधानकर्ता और इस परियोजना के निदेशक झान चांगफा ने कहा कि अब ‘कियानशू गुआनयिन’ के अगले 50 वर्षो तक इसी तरह चमकते रहने की उम्मीद है। यह प्रतिमा 7.7 मीटर ऊंची और 12.5 मीटर चौड़ी है। इसका निर्माण सोंग राजवंश (1127 से 1279) के काल में हुआ था।
साभार : http://tinyurl.com/nj5yd5s
Sunday, April 26, 2015
टाइगर नेस्ट बुद्धिस्ट मोनेस्ट्री ,भूटान
टाइगर'स नेस्ट बुद्धिस्ट भूटान में पारो वैली में एक सीधे पहाड़ की चोटी पर स्थित है। और यह मोनेस्ट्री समुद्र तल से 3,000 मीटर ऊपर है ,यह मोनेस्ट्री को पहली बार 1692 में बनाया गया था,कहा ऐसा जाता है यह वह स्थान पर बनी है जहा बौद्ध गुरु पद्मसंभव ने 8 वीं सदी में तीन साल, तीन महीने, तीन सप्ताह, तीन दिन तक ध्यान किया था और वही स्थान पर यह मोनेस्ट्री है। भूटान में यह मान्यता है की हर भूटानी व्यक्ति को कम से कम एक बार इस स्थान पर आना ही चाहिए ,बौद्ध गुरु पद्मसंभव को ही भूटान में बौद्ध धर्म के प्रसार का श्रेय जाता है
साभार : http://buddhkathaiye.blogspot.in/