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Tuesday, March 7, 2017

गोरसम चोरटेन, तवांग

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यह एक स्तूप है, जो तवांग कस्बे से 90 किमी दूर है। खास बात यह है कि यह इस क्षेत्र का सबसे बड़ा स्तूप है। ऐसा माना जाता है कि इस स्तूप का निर्माण 12वीं शताब्दी के आरंभ में एक मोनपा संत लामा प्राधार द्वारा किया गया था। यह एक अर्ध-वृत्ताकार गुंबदनुमा संरचना है, जिसका ऊपरी हिस्सा नुकीला है। यह तीन चबूतरे वाले स्तंभ पर टिका हुआ है। इस स्तूप के चार लघु रूप को तल के सबसे निचले चबूतरे के चारों कोणो पर स्थापित किया गया है। स्तूप तक एक फुटपाथ भी बनाया गया है, जिससे तीर्थ यात्री प्रार्थना करने के लिए पहुंचते हैं।

Wednesday, April 29, 2015

चीन : दान से बना है दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध रिहायशी स्कूल

 
 
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बीजिंग. चीन के चेंगदू से करीब 600 किमी दूर यह स्कूल 1980 में एक इमारत में शुरू हुआ था। अब फैलकर कस्बे में बदल गया है। कस्बे का निर्माण सिर्फ दान से हुआ है।
नाम है लारुंग गार बुद्धिस्ट एकेडमी। यह दुनिया का सबसे बड़ा रिहायशी बौद्ध स्कूल है। यहां पर तिब्बत के पारंपरिक बौद्ध शिक्षा का अध्ययन करने के लिए कई देशों से बच्चे आते हैं। यहां सभी घरों के रंग लाल और भूरे हैं। लड़के-लड़कियों के रहने वाले इलाकों को सड़कों से बांटा गया है।
बुद्धिस्ट एकेडमी के कुछ तथ्य :
40,000 छात्र रहते हैं यहां पर
12,500 फीट ऊंचाई पर बसा है
टीवी देखना यहां पर बैन है, लेकिन स्मार्टफोन की अनुमति है
ज्यादातर बच्चों के पास सेकंड हैंड आईफोन जरूर मिल जाएगा
साभार : http://infomerciallist.com/detail.html?query=Largest-Buddhist-academy-Larung-Gar-which-made-up-of-monks-help-of-Donation







Sunday, April 26, 2015

टाइगर नेस्ट बुद्धिस्ट मोनेस्ट्री ,भूटान

टाइगर नेस्ट बुद्धिस्ट मोनेस्ट्री ,भूटान 
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Taktshang2
टाइगर'स नेस्ट बुद्धिस्ट भूटान में पारो वैली में एक सीधे पहाड़ की चोटी पर स्थित है। और यह मोनेस्ट्री समुद्र तल से 3,000 मीटर ऊपर है ,यह मोनेस्ट्री को पहली बार 1692 में बनाया गया था,कहा ऐसा जाता है यह वह स्थान पर बनी है जहा बौद्ध गुरु पद्मसंभव ने 8 वीं सदी में तीन साल, तीन महीने, तीन सप्ताह, तीन दिन तक ध्यान किया था और वही स्थान पर यह मोनेस्ट्री है। भूटान में यह मान्यता है की हर भूटानी व्यक्ति को कम से कम एक बार इस स्थान पर आना ही चाहिए ,बौद्ध गुरु पद्मसंभव को ही भूटान में बौद्ध धर्म के प्रसार का श्रेय जाता है
साभार : http://buddhkathaiye.blogspot.in/