Thursday, July 25, 2019
🍁38-महातण्हासंखय-सुत्त🍁 🍁मज्झिम निकाय (1.4.8) 🍁
Wednesday, July 17, 2019
🌷महास्कन्धक🌷
Saturday, May 11, 2019
☀ *सम्मा दिट्ठी सुत्त* ☀
☀ *सम्मा दिट्ठी सुत्त* ☀
🎯 Reference :-
*मज्झिम निकाय*
1. *मूल-पण्णासक*
1. *मूल-पलियाय-वग्ग*
9. *सम्मादिट्ठी सुत्तं*
ऐसा मैने सुना—
एक समय *भगवान बुद्ध* सावत्थि के अनाथपिण्डक के आराम जेतवन में विहार करते थे।
वहाँ *आयुष्मान सारिपुत्त* ने भिक्खुओं को संबोधित किया— *आवुसो भिक्खुओं* !
*आवुस !* (कह) उन भिक्खुओं ने आयुष्मान *सारिपुत्त* को उत्तर दिया।
*आयुष्मान सारिपुत्त* ने यह कहा—
*आवुसो* !
*सम्मादिट्ठी(Equanimous View / Perfect view ; ठीक सिद्धांत वाला) कही जाती है*
*आवुसो* !
कैसे *अरिय सावक( #वास्तविक अनुगमक
factual follower)*
*सम्मादिट्ठी(Equanimous View / Perfect view ; ठीक सिद्धांत वाला)* होता है?
उसकी *दिट्ठी सम्यक्* , वह *धम्म* में अत्यन्त *सद्धावान(faithful with Knowledge)*
(और) इस संद्धर्भ को प्राप्त (होता है)?”
📍*आवुस* !
इस भाषण का अर्थ जानने के लिये हम दूर से भी *आयुष्मान सारिपुत्त* के पास आते हैं। अच्छा हो, *आयुष्मान सारिपुत्त* ही इस वचन का अर्थ कहें। *आयुष्मान सारिपुत्त* (के मुख) से सुनकर *भिक्खु* धारण करेंगे।”
📌“तो *आवुसो* ! सुनो, अच्छी तरह मन में करो कहता हूँ।”
📍*अच्छा आवुस* ! (कह) उन *भिक्खुओं* ने *आयुष्मान सारिपुत्त* को उत्तर दिया।
📌 *आयुष्मान् सारिपुत्त* ने यह कहा-
“जब, *आवुसो* !
*अरिय सावक( #वास्तविक अनुगमक
factual follower)*
*अकुसल( #Bad phenomena )* को जानता है,
*अकुसल- मूल* को जानता है;
*कुसल( #Good phenomena )* को जानता है ;
*कुसल मूल* को जानता है;
इतने से *आवुसो* !
अरिय सावक *सम्मादिट्ठी(Equanimous View / Perfect view ; ठीक सिद्धांत वाला)* होता है।
उसकी दिट्ठी सम्यक् (होती है), वह *धम्म* में अत्यन्त *सद्धावान( #faithful with Knowledge)* (और) इस संद्धर्भ को प्राप्त होता है।
🔴 क्या है, *आवुसो* !
*अकुसल( #Bad phenomena )* ?
क्या है *अकुसल मूल* ?
क्या है *कुसल( #Good phenomena )*
क्या है *कुसल-मूल* —?
☸ *आवुसो* !
(1) *प्राणातिपात* ( #हिंसा=unnecessarily killing ) अकुसल है;
(2) *अदत्तादान* अदिन्नादान( #चोरी, डकैती ,लूट) अकुसल है;
(3) *कामेसुमिच्छाचार* (=Improper way of works by Body& Mind)* काम ( #स्त्री-संसर्ग) में मिथ्याचार ( #दुराचार) .....॰
(4) *मुसावादो* ( #बकवाद,झूँठ Improper speech) मृषावाद ( #झूठ बोलना) .....॰
(5) *पिशुनवचन* ( #चुगली) ॰;
(6) *परूषवचन* ( #कठोर भाषण) ॰;
(7) *संप्रलाप* ( #बकवाद) ॰;
(8) *अभिध्या* ( #लालच) ॰;
(9) *व्यापाद* ( #प्रतिहिंसा) ॰;
(10) *मिथ्यादिट्ठी* ( #False view ,improper view , उल्टी दृष्टि )
—यह *आवुसो* !
*अकुसल* ( #bad phenomena ) कहा जाता है।
🌀 क्या है आवुसो!
*अकुशल-मूल* ?—
(1) *लोभ* ( #लालच), *आसक्त* ( #attachment) अकुसल-मूल है,
(2) *दोस* ( #hatred will ) ....॰
(3) *मोह* ( #delusion) अकुसल-मूल है।—
यह *आवुसो* !
*अकुसल-मूल* कहा जाता है।
क्या है *आवुसो* !
🌺 *कुसल* (#Good phenomena ) ?—
(1) *प्राणातिपात* ( #हिंसा=unnecessarily killing ) से विरति (= विरत होना) कुसल है;
(2) *अदत्तादान* *अदिन्नादान* ( #चोरी, डकैती ,लूट) से विरति ........ ॰
(3) *कामेसुमिच्छाचार* (#Improper way of works by Body& Mind) कामों में मिथ्याचार से विरति ........ ॰
(4) *मुसावादो* (#बकवाद,झूँठ Improper speech) मृषावाद ( #झूठ बोलना) से विरति ......... ॰
(5) *पिशुनचवन* से विरति ....... ॰
(6) *परूष-वचन* से विरति ......... ॰
(7) *संप्रलाप* से विरति .......... ॰
(8) *अन अभिध्या* .......... ॰
(9) *अ-व्यापाद* ॰;
(10) *सम्मादिट्ठी(Equanimous View / Perfect view ; ठीक सिद्धांत वाला)* कुसल है।
—यह *आवुसो* !
*कुसल* (#Good phenomena ) कहा जाता है।
🔴 क्या है *आवुसो* ! --- *कुसलमूल* ?
(1) *अ-लोभ कुसल-मूल है!*
(2) *अ-दोस कुसल-मूल है!*
(3) *अ-मोह कुसल-मूल है!*
—यह आवुसो !
*कुसल-मूल कहा जाता है।*
📌जब *आवुसो* !
अरियसावक इस प्रकार *अकुसल* को जानता है, इस प्रकार *अकुसल-मूल* को जानता है।
📌 इस प्रकार *कुसल* को जानता है।
इस प्रकार *कुसल मूल* को जानता है!
(तो) वह राग-अनुशय ( # ॰ मल) का परित्यागकर,
प्रतिघ ( #प्रतिहिंसा) अनुशय को हटाकर, अस्मि ( #मैं हूँ) इस दृष्टि-मान ( #धारणा के अभिमान)-अनुशय को उन्मूलन कर, *अविज्जा meaning action reaction unknowingly* को नष्ट कर, विद्या को उत्पन्न कर, इसी जन्म मे दुःखो का अन्त करने वाला होता है।
इतने से भी आवुसो!
*अरिय सावक* ( #वास्तविक अनुगमक
factual follower)
*सम्मादिट्ठी* ( #Equanimous View / Perfect view ; ठीक सिद्धांत वाला) होता है॰।
📍“ठीक *आवुस* !” (कह) उन भिक्खुओं ने *आयुष्मान सारिपुत्त* के *धम्मदेशना*
(#Dhamma teaching) का साधु अनुमोदन कर,
☀ आयुष्मान सारिपुत्त
से आगे का प्रश्न पूछा—क्या *आवुस* !
और भी पर्याय ( #प्रकार) है, जिससे कि *अरिय सावक( #वास्तविक अनुगमक
factual follower)*
*सम्मादिट्ठी(Equanimous View / Perfect view ; ठीक सिद्धांत वाला)* होता है ..... ॰ ?”
*आवुसो ! जब आवुसो* !
*अरिय सावक आहार को जानता है*
आहार-समुदय ( #आहार की उत्पत्ति) को जानता है, आहार-निरोध ॰, आहार-निरोध-गामिनी प्रतिपद् ( #आहार के विनाश की ओर ले जाने वाले मार्ग) को जानता है। इतने से आवुसो! अरियसावक *सम्मादिट्ठी(Equanimous View / Perfect view ; ठीक सिद्धांत वाला)* होता है ॰।
🔴 क्या है , *आवुसो* !
आहार, क्या है ... आहार-समुदय॰ .... आहार-निरोध...॰ आहार निरोध गामिनी प्रतिपद् °?
— *आवुसो* ! सत्त्वों की स्थिति (और) होने वालों की सहायता के लिये भूतों ( #प्रणियों) के यह चार आहार हैं।
📌कौन से चार?—
(1) स्थूल या सूक्ष्म कवलिंकार ( #ग्रास करके खया जाने वाला) आहार,
(2) *फस्स* ( #स्पर्श )दूसरा,
(3) *मन की संचेतना* ( #ख्याल) तीसरा,
(4) *विञ्ञान* ( #विज्ञान) चौथा।
📌 *तण्हा समुदय* ( #उत्पत्ति) (ही) आहार का समुदय है।
📌 *तण्हा निरोध आहार का निरोध है।*
यह *अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो आहार-निरोध गामिनी प्रतिपद् है* !
🌺 जैसे कि—
*दुक्खं निवारणं मग्गो*
The path of miseries treatment
*अरिय अट्ठंगिको मग्गो*
*Eightfold factual path*
१- *सम्मा दिट्ठी*
#Equanimous View.
*सम्मादिट्ठी* ( #Perfect view)
२- *सम्मा सङ्गकप्पो*
#Equanimous determination..
३- *सम्मा वाचा*
#Equanimous speech..
४- *सम्मा कम्मंतो*
#Equanimous acts .
५- *सम्मा आजीवो*
#Equanimous profession ..
६- *सम्मा वायमो*
#Equanimous effort..
७- *सम्मा सति*
#Equanimous attentiveness ..
८- *सम्मा समाधि*
#Equanimous unshaken concenrtation of mind
जब *आवुसो* !
*अरिय सावक* (#वास्तविक अनुगमक
factual follower)
इस प्रकार आहार को जानता है ॰, तो वह सर्वथा रागानुशय का परित्याग कर ॰ दुःखों का अन्त करने वाला होता है।
इतने से आवुसो!📍“ठीक आवुस!”
यह (कह) उन भिक्खुओं ने ॰1 आगे का प्रश्न पूछा—॰1।”
🔴 *आवुसो! जब आवुसो* !
*अरिय सावक* (#वास्तविक अनुगमक
factual follower)
*दुःख* को जानता है,
*दुःख-समुदय* (= दुःख की उत्पत्ति, या कारण) को जानता है,
*दुःख-निरोध* को जानता है, (और)
*दुःख-निरोधगामिनी प्रतिपद्* को जानता है;
तब आवुसो ! *अरियसावक* !
**सम्मादिट्ठी* ( #Equanimous View / Perfect view ; ठीक सिद्धांत वाला) होता है॰1।
🌀 क्या है *आवुसो*!
*दुःख* क्या है,
*दुःख-समुदय* क्या है
*दुःख-निरोध* क्या है
*दुःख निरोध-गामिनी प्रतिपद्* ?
*जरा-मरणं-सोक-परिदेव-दुक्ख-दोमनस्स-उपायासा भी दुःख* है,
किसी (चीज) की इच्छा करके उसे न पाना (यह) भी दुःख है;
संक्षेप में *पाँचों उपादान* ( #विषय के तौर पर ग्रहण करने योग्य) *खन्ध दुःख* हैं।
इसे *आवुसो* !
*दुःख कहा जाता है।*
*क्या है आवुसो ! दुःख-समुदय?*
🌺 यह जो नन्दी उन उन (भोगों) का अभिनन्दन करने वाली, राग से संयुक्त, फिर फिर जन्म ने की तण्हा है;
🌀 जैसे कि—
1) *कामभव*
( #sensual pleasure abode ,छः इन्द्रियों का मजा अथवा दुख वाले निवास ) की तण्हा
2) *रूपभव* ( #fine metrial abode , अस्थूल शरीर काय ), की तण्हा
3) *अरूपभव* (#immaterial abode , शरीर-रहित अवस्था) की तण्हा
—यह *आवुसो* !
*दुःख-समुदय कहा जाता है।*
🔴 क्या है *आवुसो* !
☸ *दुःख-निरोध* ?
—जो उस तण्हा का संपूर्ण तया विराग, निरोध, त्याग=प्रतिनिस्सर्ग, मुक्ति, अनालय (= उसमें लीन न होना)।
— *यह कहा जाता है आवुसो ! दुःखनिरोध।*
क्या है *आवुसो* !
___ *दुःखनिरोध-गामिनी प्रतिपद्* ?
___ यह *अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो* ॰ है। (4)
जैसे कि-
(1) **सम्मादिट्ठी* (Equanimous View / Perfect view ; ठीक सिद्धांत वाला) ......
(8) *सम्मा समाधि* ( #equanimous unshaken-mind , Equanimous=सम्मा meaning towards purity )
जब आवुसो! *अरिय सावक( #वास्तविक अनुगमक factual follower)*
इस प्रकार दुःख को जानता है ॰ ॰
इतने से आवुसो! ॰।📍“ठीक, आवुस! ॰1।”
☸ *आवुसो! जब आवुसो* !
*अरियसावक जरा-मरण को जानता है*....॰ *समुदय* .... ॰ ॰
*निरोध* ...॰॰
*निरोध गामिनी प्रतिपद् को जानता है*....°
जब *आवुसो* ! ... *अरियसावक*..... ॰1
क्या है *आवुसो* !
*जरा-मरण*... ॰ *समुदय*....॰ निरोध, ॰ *निरोध-गामिनी प्रतिपद्* .... ?—
जो उन उन प्राणियों की उन उन प्राणि-शरीरों में जरा ( #बुढापा) जीर्णता, खाण्डित्य ( #दाँत टूटना), पालित्य ( #बाल पकना), वलित्वक्ता ( #झुर्री पडना), आयु-क्षय, इन्द्रिय-परिपाक ( #विकार)।—यह कही जाती है आवुसो! जरा क्या है?
आवुसो! मरण?—जो उन उन प्राणियों की उन उन प्राणि-शरीरों से च्युति=च्यवन होना, भेद ( #वियोग), अन्तर्धान, मृत्यु, मरण=कालक्रिया, स्कन्धों का विलग होना, कलेवर का निक्षेप ( #पतन)।
🌺 *यह कहा जाता है आवुसो! मरण।*
इस प्रकार यह जरा और यह मरण (दोनों मिलकर) *जरा-मरण* होते है।
*जाति-समुदय* ( #जन्म का होना) *जरा-मरण-समुदय है*
*जाति-निरोध* (होने से),
*जरा-मरण-निरोध होता है* ।
यही *अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो*
जरा *मरण निरोध गामिनी प्रतिपद् है* ; जैसे कि ॰1। जब आवुसो! ॰1।”📍ठीक आवुस! ॰1”
📌“आवुसो! जब आवुसो!
*अरिय सावक( #वास्तविक अनुगमक
factual follower)*
*तण्हा(libido)* को जानता है...॰
*समुदय* .....॰॰ *निरोध*.... ॰॰
*निरोधगामिनी प्रतिपद्* को जानता है;
तब आवुसो! "अरियसावक* ॰1। क्या है,
आवुसो! *तण्हा(libido)*... ॰
*समुदय* ..... ॰ *निरोध* .... ॰
*निरोधगामिनी प्रतिपद्* ?
🔴 — आवुसो ! *तण्हा(libido)* के यह छः आकार (= काया, =समुदाय) हैं—
१) *रूप-तण्हा* ( #libido)
२) *शब्द-तण्हा* (libido)
३) *गन्ध-तण्हा* (libido)
४) *रस-तण्हा* (libido)
५) *फस्स तण्हा* स्पर्श (touch) ( libido)
स्प्रष्टव्य-( #त्वक् का विषय)-तण्हा,
६) *धम्म तण्हा(libido)*
( #मन के विषय की)-
*वेदना-समुदय* (ही) *तण्हा-समुदय* है,
*वेदना-निरोध* (ही) *तण्हा-निरोध* है।
यही *अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो*
*तण्हा-निरोध गामिनी प्रतिपद् है*
जैसे कि ॰1। जब आवुसो! ॰1।”📍“ठीक, आवुस! ॰1”
📌“आवुसो!
॰ *वेदना* को जानता है°
*समुदय* ....॰,. *निरोध* .....॰
॰ *निरोध-गामिनी प्रतिपद्* को जानता है।
तब आवुसो! अरियसावक ॰1।
क्या है, आवुसो! *वेदना, ॰ समुदय, ॰ निरोध, ॰ निरोध गामिनी प्रतिपद्* ?—
🌺 --- *आवुसो* !
*वेदना के यह छ आकार हैं* —
(1) *चक्खुसम्फस्सजा* - *चक्खु* (#आंख) के संस्पर्श से उत्पन्न होने वाली संवेदना
(2) *सोतसम्फस्सजा* - *सोत* (#श्रोत्र )के
संस्पर्श से उत्पन्न होने वाली संवेदना,
(3) *घानसम्फस्सजा* - घाण के
संस्पर्श से उत्पन्न होने वाली संवेदना,
(4) *जिह्वासम्फस्सजा* - *जिह्वा* ( #जीभ )
संस्पर्श से उत्पन्न होने वाली संवेदना,
(5) *कायसम्फस्सजा* - *काया* के संस्पर्श से उत्पन्न होने वाली संवेदना
(6) *मनोसम्फस्सजा* - *मन* के संस्पर्श से उत्पन्न होने वाली संवेदना, ।
🌺१) *चक्खु +रूप (प्रकाश) चक्खुविञ्ञान*
🌺२) °°° *सोत्त +सब्द ---> सोत्तविञ्ञान* !
🌺 ३) °°° *घाण +गन्ध घाणविञ्ञान*
🌺 (४) °°° *जिह्वा+रस ---> जिह्वाविञ्ञान*
🌺 ५) °°° *काया+फस्स ( #touch )
--->कायविञ्ञान*
*फस्स* ( #touch स्पर्श इन्द्रिय और विषय का संयोग)-समुदय (से ही) वेदना-समुदय (होता है)
*फस्स-निरोध से वेदना-निरोध होता है।*
यही *अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो* वेदना- निरोध गामिनी प्रतिपद् है, जैसे कि ॰1। जब आवुसो ॰1।📍“ठीक आवुस! ॰1।”
🔴 है, *आवुसो* !
॰ *फस्स* (स्पर्श teach #इन्द्रिय और विषय का संयोग) को जानता है, ॰ समुदय, ॰॰।
तब आवुसो! अरियसावक ॰1।
क्या है *आवुसो* !
*फस्स (स्पर्श teach ) , *समुदय* ॰॰।?—
🌺 *आवुसो* !
*फस्स* के यह प्रकार (या समुदाय) हैं
(1) *चक्खुसम्फस्सो* _ चक्षुः-संस्पर्श,
(2) *सोतसम्फस्सो* _ श्रोत्र-संस्पर्श,
(3) *घाणसम्फस्सो* _ घ्राण-संस्पर्श,
(4) *जिह्वासम्फस्सो* _ जिह्वा सस्पर्श,
(5) *कायसम्फस्सो* _ काय-संस्पर्श,
(6) *मनोसम्फस्सो* _ मनः-संस्पर्श।
🌀 *षड्-आयतन* (= चक्खु, श्रोत्र, घ्राण, जिह्वा, काय या त्वचा और मन यह छः इन्द्रियाँ)-
*समुदय (ही) स्पर्श-समुदय है।*
*षडायतन-निरोध से फस्स-निरोध (होता है)।*
*यही अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो*
*फस्स-निरोध-गामिनी प्रतिपद् है* , जैसे कि ॰1। जब आवुसो ॰1।📍“ठीक आवुस! ॰1”
🌸 *आवुसो* !
॰ *षडायतन को जानता है, ॰ समुदय ॰। ॰ ॰ ।
तब आवुसो! अरियसावक* ॰1।
क्या है आवुसो ! *षडायतन* ॰ *निरोध* ॰॰?
—आवुसो! यह छ आयतन ( #इन्द्रिय) हैं—
(1) *चक्खु-आयतन*
(2) *श्रोत्र-आयतन*
(3) *घ्राण-आयतन*
(4) *जिह्वा-आयतन*
(5) *काय-आयतन*
(6) *मन-आयतन*
*नाम-रूप( #विञ्ञान और रूप वेदना सञ्ञा संखा़र )समुदय*
*षडायतन-समुदय* है,
*नाम-रूप-निरोध (ही) षडायतन-निरोध है* ।
यही *अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो* ॰1।॰1।
📍“ठीक आवुस! ॰”
“है, आवुसो!
*नाम-रूप* को जानता है* ? ॰ *समुदय* ॰॰॰
तब *आवुसो! अरियसावक* ॰1।
🔴 क्या है *आवुसो*!
*नाम-रूप, ॰ निरोध* , ॰ ॰?—
(1) *वेदना* (#संवेदना sensation )
(= विषय और इन्द्रिय के संयोग से उत्पन्न मन पर प्रथम प्रभाव),
(2) *सञ्ञा(Perception)*
(#संज्ञा संवेदना के अनंतर की मन की अवस्था),
(3) *चेतना* ( #संज्ञा के अनंतर की मन की अवस्था)
(4) *फस्स* ( #स्पर्श, teach )
*नाम संखा़र( #stored /memorised work)*
*मनसिकार* ( #picked up by mind अर्थात चित्त द्वारा सम्बद्ध इन्द्रिय अनुभव को जानना)
🎯 🎯 *विशेष टिप्पणी* ! 🎯 🎯
*वेदना सञ्ञा चेतना फस्स मनसिकारो*
इसे नाम कहा है , *अर्हंत अग्र धम्म सेनापती सारिपुत्त* जी ने ।
तो *चेतना फस्स दोनों मिलाकर संखार खन्ध ही के भाग* हैं ,उन्होंने ज्यादा खोलकर कहा है ।
*मनसिकारो यह है विञ्ञान है !*
क्योंकि
यहां *सारिपुत्त* के ये वचन हैं जो *भगवा बुद्ध* द्वारा *अनुमोदित* हैं ।
पर *भगवांबुद्ध* जगह जगह
*नामरूप* को
*नाम=वेदना सञ्ञा संखार विञ्ञान कहते हैं*
(यहां *भन्ते सारिपुत्त* ने
*संखार के दो चेतसिकों , चेतना और फस्स ( #volition & contact/touch)* को दिखाया है ।
और
*विञ्ञान* की जगह
*मनसिकारो* ( #consciousness arises known by mind) को दर्शाया है जो कि अभिधम्म अनुसार ज्यादा खोलकर समझाया हैं !
🔴 —यह *आवुसो* !
नाम हैं। चार महाभूत और चार महाभूतों को लेकर (बने) रूप, आवुसो रूप कहा जाता है।
इस प्रकार यह नाम, (और) यह रूप, (दोनों मिलकर)
🌺आवुसो ! *नाम-रूप* कहा जाता है।
*विञ्ञान* ( #Eternal Energy)
*विञ्ञान-समुदय नाम-रूप-समुदय है।*
*विञ्ञान-निरोध, नाम-रूप-निरोध है।*
यही *अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो* ॰1। ॰1।
“ठीक आवुस! ॰1”
🔴 है, आवुसो! ॰
विञ्ञान को जानता है, ॰ समुदय, ॰ ॰।
तब आवुसो! अरियसावक ॰1।
क्या है आवुसो! *विञ्ञान, ॰ समुदय* ॰ ॰?
☸ — *आवुसो* !
*यह छ विञ्ञान के समुदाय (= काय) हैं* —
(1) *चक्खु-विञ्ञान*
(2) *श्रोत्र-विञ्ञान*
(3) *घ्राण-विञ्ञान*
(4) *जिह्वा-विञ्ञान*
(5) *काय-विञ्ञान*
(6) *मनो-विञ्ञान*
*सखा़रं-समुदय विञ्ञान-समुदय है!*
*सखा़रं-निरोध विञ्ञान-निरोध है।*
यही *अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो* ॰1। ॰1।
📍“ठीक आवुस! ॰1”
📌 *आवुसो* ! ॰
सखा़रं को जानता है। ॰ समुदय, ॰ ॰।
तब आवुसो! *अरिय सावक( #वास्तविक अनुगमक factual follower)* ॰1।
🌸 क्या है आवुसो!
सखा़रं, (= क्रिया, गति) ॰ समुदय, ॰ ॰?—
आवुसो! यह तीन सखा़रं है—
(1) *कायसखा़रं* - काय-संस्कार,
(2) *वाचासखा़रं* - वचन-संस्कार,
(3) *चित्तसखा़रं* - चित्त-संस्कार,
*निरोध* है। यही *अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो* ॰1। ॰1।📍“ठीक आवुस! ॰1”
📌 *आवुसो* !
॰ *अविज्जा meaning action reaction unknowingly* को जानता है, ॰ समुदय, ॰ ॰।
तब आवुसो! *अरिय सावक( #वास्तविक अनुगमक factual follower)* ॰1।
क्या है आवुसो *अविज्जा* , ॰ समुदय, ॰ ॰?
🔴 —आवुसो !
जो यह *दुःख के विषय में अविज्जा* ,
*दुःख समुदय के विषय में अविज्जा* , *दुःख-निरोध के विषय में अविज्जा* , *दुःख-निरोध-गामिनी प्रतिपद् के विषय में अविज्जा*
--- इसे *आवुसो* !
*अविज्जा meaning action reaction unknowingly* कहा जाता है।
*आस्रव-समुदय अविज्जा-समुदय है।*
*आस्रव-निरोध अविज्जा-निरोध है।*
यही *अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो* ॰1। ॰1।
📍“ठीक आवुस! ॰1”
🌺 है, *आवुसो* ! ॰
*आस्रव ( #चित्तमल) को जातना है*....०
॰ समुदय ॰ ॰।
तब आवुसो! अरियसावक ॰1।
क्या है आवुसो! आस्रव, ॰ समुदय ॰ ॰?—
*आवुसो* ! यह तीन आस्रव हैं—
(1) *काम-आस्रव* ,
(2) *भव-आस्रव* ( #पुनब्भव )
(3) *अविज्जा-आस्रव।*
*अविज्जा-समुदय आस्रव-समुदय है*
*अविज्जा-निरोध आस्रव-निरोध है।*
*यही अरिय अट्ठङ्गिको मग्गो* ॰1।
📌 इतने से आवुसो !
*अरिय सावक* ( #वास्तविक अनुगमक
factual follower)
**सम्मादिट्ठी(Equanimous View / Perfect view ; ठीक सिद्धांत वाला) होता है, उसकी दिट्ठी सम्यक् (होती है), वह धम्म मे अत्यन्त *सद्धावान( #faithful with Knowledge)* , (और) इस संद्धर्भ को प्राप्त होता है।”
🌺 *आयुष्मान् सारिपुत्त* ने यह कहा, सन्तुष्ट हो उन *भिक्खुओं* ने आयुष्मान सारिपुत्त के *धम्मदेशना* का *साधु अनुमोदन* किया।
*साधु साधु साधु* ! 🙏🙏🙏
📌📌📌📌📌📌📌📌📌📌📌📌
*परिशिष्ट (Appendix)*
🔴 १-*अविज्जा* (=५२चेतसिक विञ्ञान में से एक ,जो कि चित्त-विञ्ञान के सहगत रहता है और जिसका काम है ढंकना अथवा तथ्य को छुपाना)
के *पच्चया(=assimilation)* अर्थात कारण से
*सङ्खारा/संखारा* (=impressions into consciousness) उत्पन्न होते हैं ।
🔴 २-*सङ्खारो/संखारो* ( #संस्कारों) के *पच्चया( #assimilation)* से *विञ्ञान( #नया चैतन्य तत्व ,new conscious waves)*,
🔴 ३- *विञ्ञान* ( #conscious waves ) के *पच्चया( #assimilation)* से *नाम-रूप*
🔴 ४- *नाम-रूप( #body & mind)* के *पच्चया( #assimilation)* से *सळायतन* ( #षडायतन,six organ system of body)
🔴 ५- *सळायतन के पच्चया* (#assimilation) से *फस्स* (#स्पर्श)
🔴 ६- *फस्स के पच्चया* ( #assimilation) से *वेदना* (=sensations of pleasure ,pain & neutral)
🔴 ७- *वेदना के पच्चया*
( #assimilation) से *तण्हा* (=libido,तृष्णा)
🔴 ८- *तण्हा* (libido) के *पच्चया(=assimilation)* *उपादान* (=आसक्ति,addiction),
🔴 ९- *उपादान के पच्चया* (=assimilation) से *भव(=happening, changing to new)*
🔴 १०- *भव(=changing to new) के पच्चया(=assimilation) से *जाति* (=new form, new stage of body&mind )*
🔴११- *जाति के पच्चया*(=assimilation) से *जरा मरणं, सोक, परिदेव, दुक्ख दोमनस्सुपायासा* (बुढा़पा, मृत्यु, शोक, परिदेव, दु:ख-दौर्मनस्य एवं उपायास) उत्पन्न होते हैं।
इस प्रकार इस समस्त *दुक्ख-खन्ध(रूपनाम ,body&life) का समुदय ( #पुराने का नया उत्पाद) होता है।*
🌺पटिच्चसमुप्पाद भव चक्क🌺
अविज्जा
🔄 🔄
संखा़र जरा-मच्चु
🔃 🔃
विञ्ञान जाति
🔃 🔃
नामरूप भव
🔃 🔃
षडायतन उपादान
🔃 🔃
फस्स तण्हा ((libido)
🔄 🔄
वेदना
(Sensations)
📌📌📌📌📌📌📌📌📌📌📌📌
🌺 *साधु साधु साधु* ! 🙏🙏🙏
☸ *धम्म चक्क गतिमान* ! ☸
⚜ *जय मङ्गल धम्म* ! ⚜
☸ *नमो बुद्धाय* ! 🙏🙏🙏
Monday, October 15, 2018
लखनऊ में पहली बार अन्तरराष्ट्रीय त्रिपिटक संगायन
7-8 नवम्बर'2018 को लखनऊ में पहली बार आयोजित होने जा रहे अन्तरराष्ट्रीय त्रिपिटक संगायन की तैयारियाँ अन्तिम चरण में। पूरे प्रदेश में धम्मसेवक, धम्मसेविकाएं जनसम्पर्क अभियान पर रवाना। प्रवेश के लिए पंजीकरण अनिवार्य। प्रवेश सिर्फ और सिर्फ सफेद व शालीन वस्त्रों में।
विस्तृत जानकारी के लिए सम्पर्क करें:
श्री राकेश कुमार(8687198572)
श्री एम पी गौतम(9532674422)
श्री अवधेश कुमार(8707770810)
श्रीमती समृद्धि(9795140505)
सुश्री ज्योति भारती(6386955501)
श्रीमती नीलू(9450622071)
आप एक सक्रिय समाज सेवी , धम्म प्रचारक व ध्यान प्रशिक्षक भी हैं ।
Saturday, October 13, 2018
।।स्वर्ग-नरक।। -श्री राजेश चन्द्रा-
-राजेश चन्द्रा-
एक दिन एक विख्यात सामुराई, तलवारबाज, नोबूशिगे गुरु हकुईन के दर्शन करने आया। उसने गुरु के सम्मुख सिर झुका कर अभिवादन किया। अभिवादन के उपरान्त उसने अपने मन की एक जिज्ञासा व्यक्त की- क्या सच में स्वर्ग और नरक होते हैं?
यह सुन कर गुरु हकुईन ने पूछा- तुम्हारा नाम क्या है?
'नोबूशिगे'
'करते क्या हो?'
'जी, मैं सामुराई हूँ, तलरवारबाज'
'सामुराई!', हकुईन ने विस्मय से पूछा,' तुम्हें सामुराई किसने बना दिया? तुम्हारा चेहरा तो भिखारियों जैसा है!' यह सुनते ही नोबूशिगे का चेहरा तमतमा गया और उसका हाथ अपनी तलवार की मूठ पर गया।
हकुईन ने कहा- अच्छा, तो तुम्हारे पास तलवार भी है! लेकिन दुनिया की कोई तलवार हकुईन की गर्दन नहीं काट सकती।
नोबूशिगे ने तलवार म्यान के बाहर निकाल ली।
हकुईन मुस्कराए, कहा- देखो, नरक का द्वार खुल गया।
सामुराई को अहसास हो गया कि यह गुरु का अपना तरीका है उसके सवाल का जवाब देने का। उसने शर्मिन्दा होकर तलवार अपनी म्यान में सरका ली और सिर झुकाया जैसे कि क्षमा मांग रहा हो।
हकुईन फिर मुस्कराए, कहा- देखो, स्वर्ग का द्वार खुल गया।
नोबूशिगे अपने प्रश्न का उत्तर पा चुका था।
आप एक सक्रिय समाज सेवी , धम्म प्रचारक व ध्यान प्रशिक्षक भी हैं ।
Thursday, October 4, 2018
सत्कर्मो से सद्गति
किसी गांव के एक मुखिया ने भगवान बुद्ध से पूछा कि लोग सुगति प्राप्त करने के लिए बहुत से कर्मकांड करते हैं, अनेक प्रकार की वेश-भूषा, माला-गंध-विलेपन धारण करते हैं, अनेक प्रकार से अग्निपरिचय व अन्य कर्मकांड करके समझते हैं कि हमने सब कुछ कर लिया। कुछ ऐसे भी हैं जो निम्न कोटि की तांत्रिक साधना करके किसी प्रेत-प्राणी से बात करते हैं और उसके द्वारा लोगों को स्वर्ग ले जाने का दावा करते हैं। भगवान आप तो सर्वज्ञ हैं। आप भी कुछ ऐसा करें जिससे कि संसार के समस्त प्राणी मरणोपरांत सुगतिमय लोक में ही जा सकें।
भगवान ने उससे ही प्रश्न पूछ कर समझाने का प्रयत्न किया। तुम क्या समझते हो कि कोई व्यक्ति जीव-हिंसक हो, चोरी करता हो, विभिचारी हो, असत्यभाषी हो, चुगलखोर हो, कर्कशभाषी (रूखा) हो, गप्पी हो, लोभी हो, नीचवृत्ति का हो, मिथ्यादृष्टियुक्त हो, तो क्या वह सुगतिमय लोक में जाने लायक है? अथवा उसके मर जाने पर बहुत से लोग वहां एकत्र होकर प्रार्थना करें, हाथ जोड़कर वंदना करें कि आप सुगतिगामी हों, सुगतिमय लोक में उत्पन्न हों तो क्या ऐसा करने पर वह सुगतिमय लोक में उत्पन्न हो सकता है? नहीं, मरणोंपरांत किया जाने वाला कोई भी कर्मकांड किसी को मुक्ति नहीं दे सकता। यह असंभव है।
एक उदाहरण से समझो। किसी बड़े जलाशय में कोई बड़ी पत्थर की शिला छोड़ दे और वह अपने भार से पानी में डूब जाय। तो क्या समझते हो कि किसी विशाल जनसमूह के प्रार्थना करने, मनौती मनाने और पूजा-पाठ या कोई अन्य कर्मकांड करने से क्या वह भारी शिला पानी पर तैरने लगेगी ?
ऐसे ही कोई व्यक्ति घी-तैल से भरे हुए घड़े को पानी में लाकर फोड़ दे और उसका घी, तैल पानी पर तैरने लगे और किसी दूसरे घड़े में कंकड़-पत्थर भर कर उसे भी फोड़े और वे अपने भार से पानी में डूब जायें। तब कोई प्रार्थना करके, पूजा-पाठ करके, कर्मकांड करके कहे कि ऐ घी तुम नीचे चले जाओ, नीचे चले जाओ! ऐ कंकर-पत्थर तुम ऊपर आ जाओ, ऊपर आ जाओ! यदि ऐसा होता हो तो करके देखो।
हे ग्रामणी! इसी प्रकार कोई व्यक्ति यदि प्राणीहिंसा से, चोरी से, व्यभिचार, असत्यभाषण आदि दुष्कर्मों से विरत रहता है और सत्यधर्म का जीवन जीता है तो मरणोपरांत वह ऊपर ही जायगा। उसकी ऊध्र्वगति ही होगी। किसी का श्राप उसे नरक के कष्टमय जीवन में नहीं भेज सकता। उसका सत्कर्म ही उसे ऊपर ले जायगा। उसे ऊपर की ओर जाने से कोई नहीं रोक सकता। यह प्रकृति का अटूट नियम है।
ऐसे ही किसी अन्य प्रसंग पर भगवान से पूछा गया कि भगवान क्या आप सब पर समान रूप से करुणाभाव रखते हैं, दयाभाव रखते हैं? यदि हां, तो किसी को बहुत लाभ होता है, किसी को मध्यम लाभ होता है और कोई-कोई धर्मलाभ से वंचित ही रह जाता है, ऐसा क्यों? आपकी मंगलमय करुणा का प्रभाव सब पर एक जैसा क्यों नहीं होता?
भगवान ने उसे एक किसान का उदाहरण देकर समझाया कि उसके पास तीन प्रकार की जमीन है- १) बहुत उपजाऊ, २) मध्यम उपजाऊ, ३) बिल्कुल ऊसर-बंजर। ऐसे में वह सबसे पहले उपजाऊ जमीन में बीज डालता है, उसके बाद मध्यम में और सबसे अंत में ऊसर-बंजर जमीन में। बीज वही होता है और उतनी ही मेहनत व लगन से डाला जाता है। लेकिन फसल एक सी नहीं होती। इसी प्रकार मेरे पास भी तीन प्रकार के लोग धर्म सीखने आते हैं। एक तो बहुत गंभीर साधक-साधिकाएं, जो उपजाऊ जमीन के समान हैं। उनमें जो बीज पड़ेगा, तुरंत फलदायक होगा। क्योंकि वे पूरी श्रद्धा और लगन के साथ काम में लग जाते हैं। दूसरे सामान्य गृहस्थ उपासक-उपासिकाएं, जो अपने दैनिक सांसारिक कार्यों में लगे रहते हुए भी धर्म सीखते हैं। वे मध्यम खेत के समान हैं। उनमें श्रद्धा और लगन तो है परंतु जीवन-जगत की अनेक बाधाएं भी हैं। फिर भी वे धर्ममार्ग पर चल कर अपना मंगल साधते ही हैं। तीसरे कुछ ऐसे लोग जो ऊसर-बंजर जमीन जैसे हैं। उपदेश तो उन्हें भी मैं वैसे ही देता हूं, परंतु अपने कर्मकांडों और अन्य जंजालों में उलझे होने के कारण वे धर्म को ठीक से ग्रहण नहीं कर पाते। वे जितना सीख ले, समझ लें और जितना अभ्यास कर लें, उन्हें केवल उतना ही लाभ होता है। कोई-कोई केवल सुन कर चला जाता है, जरा भी अभ्यास नहीं करता तो वह धर्म से सर्वथा वंचित रह जाता है। परंतु मेरी करुणा उन सब के प्रति सदैव उतनी ही रहती है।
भगवान ने एक और उदाहरण देकर समझाया कि किसी के पास तीन घड़े हों। एक बिल्कुल छिद्ररहित, दूसरा सूक्ष्म छिद्रों वाला और तीसरा बड़े छिद्र वाला। वह सबसे पहले बिना छिद्र वाले घड़े में पानी भरता है, जो दिन भर उसके काम आता है। फिर दूसरे में भरता है कि भले दिन भर न चले, पर कुछ समय तक तो उससे जल मिलता ही है। तीसरा घड़ा वह इसलिए भरता है कि जितना भी पानी एकत्र हो जाय वह नहाने अथवा कपड़ा-बर्तन धोने के काम आ जाय।
बहुत गंभीर साधक-साधिकाएं पहले घड़े के समान हैं। दूसरे घड़े के समान वे सामान्य उपासक-उपासिकाएं हैं जो कठिनाई होते हुए भी धर्म को धारण करते हैं। अन्यान्य कर्मकांडों में उलझे हुए लोग वैसे ही हैं जैसे तीसरे घड़े में भरा हुआ पानी। वे जितना ग्रहण कर लें, अभ्यास कर लें, उन्हें बस उतना ही लाभ होगा। यद्यपि मेरी दया और करुणा तो सब के प्रति समान ही रहती है।
भगवान द्वारा उपदेशित इन उदाहरणों से सबक लेकर साधको! आओ, हम भी धर्ममार्ग पर उपजाऊ क्षेत्र बन कर, श्रद्धा और लगन के साथ पांचों शीलों का कड़ाई से पालन करते हुए, सम्यक समाधि को पुष्ट करें और अनित्यबोधिनी प्रज्ञा का गहराई से अभ्यास करते हुए अपने सदाचरण के बल पर अपनी सुगति निश्चित करें। इसी में हमारा मंगल है, कल्याण है!
- कल्याणमित्र, सत्यनारायण गोयन्का
Friday, August 10, 2018
।।ओकास।।- श्री राजेश चन्द्रा-
आप एक सक्रिय समाज सेवी , धम्म प्रचारक व ध्यान प्रशिक्षक भी हैं ।






