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Wednesday, April 15, 2015

अब विपशयना दिल्ली के स्कूलों मे …

11078092_761363700645599_2930296267140671168_nदिल्ली सरकार के गवर्नमेंट स्कूलों के टीचर्स को अब एक नई ट्रेनिंग से गुजरना होगा। सरकार ने फैसला किया है कि गवर्नमेंट स्कूलों के टीचर्स को विपश्यना (मेडिटेशन) ट्रेनिंग करनी होगी और दस दिन के कोर्स को पूरा करने के बाद टीचर्स अपने स्टूडेंट्स को टेंशन फ्री रहने और सामाजिक बुराइयों से दूर रहने के गुर सिखाएंगे। शिक्षा निदेशालय ने मंडे शाम को विपश्यना ट्रेनिंग को लेकर सर्कुलर जारी कर दिया है। टीचर्स को इस ट्रेनिंग के लिए कोई खर्च नहीं करना होगा। दस दिन की ट्रेनिंग के दौरान टीचर्स को ऑन ड्यूटी माना जाएगा, साथ ही विपश्यना साधना संस्थान से सर्टिफिकेट हासिल करने वाले टीचर्स को टीए-डीए भी मिलेगा।
डिप्टी सीएम और एजुकेशन मिनिस्टर मनीष सिसौदिया ने बताया कि विपश्यना ट्रेनिंग का मकसद एजुकेशन में सुधार लाना है। यह साइंटिफिक मेडिटेशन टेक्निक है और इससे स्कूल टीचिंग को और बेहतर बनाया जा सकेगा। स्कूलों का माहौल भी बदलेगा। डिप्टी सीएम का कहना है कि सरकार का यह दायित्व है कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अच्छे नागरिक बनें और इसके लिए जरूरी है कि पॉजिटिव माहौल बनाया जाए और टीचर्स भी क्लासरूम टीचिंग में नए-नए एक्सपेरिमेंट करें। विपश्यना स्वयं का निरीक्षण करने की पद्धति है और निश्चित तौर पर इस ट्रेनिंग को करने के बाद स्कूलों का माहौल बदलेगा। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा टीचर्स इस ट्रेनिंग को करें और ट्रेनिंग का पूरा खर्चा दिल्ली सरकार उठाएगी। पढ़ाने के तौर-तरीकों में बदलाव आएगा। डिप्टी सीएम का कहना है कि अभी तो सरकारी स्कूलों के टीचर्स के लिए यह ट्रेनिंग शुरू की गई है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों को भी इस बारे में एडवाइजरी जारी की जाएगी, ताकि उन स्कूलों के टीचर्स भी इस ट्रेनिंग को करने के लिए आगे आ सकें।
देश के कई शहरों में टीचर्स को इस तरह की ट्रेनिंग करवाई जा रही है ताकि वे अपने स्टूडेंट्स को शांत रहने के तरीके सिखा सकें। बढ़ता तनाव स्टूडेंट्स पर भी भारी पड़ रहा है और विपश्यना ट्रेनिंग करने के बाद टीचर्स क्लासरूम टीचिंग में नए एक्सपेरिमेंट कर सकेंगे और स्कूल में स्टूडेंट्स के ओवरऑल डिवेलपमेंट के मकसद को हासिल किया जा सकता है। शिक्षा निदेशालय के सर्कुलर में कहा गया है कि एजुकेशन का मतलब केवल क्लासरूम में कोर्स की पढ़ाई करवाना ही नहीं है, बल्कि स्टूडेंट्स को एक अच्छा नागरिक बनाने की जिम्मेदारी भी स्कूल पर होती है। ऐसा देखा जा रहा है कि आजकल की गला-काट प्रतियोगिता के इस दौर में स्टूडेंट्स तनाव का शिकार हो रहे हैं। इसके लिए विपश्यना जैसी ट्रेनिंग भी जरूरी है। यह कोई तंत्र-मंत्र पर आधारित टेक्निक नहीं है। इस टेक्निक के बारे में डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि यह साधना पद्धति है और स्वयं को जानने की कोशिश होती है।

Saturday, May 24, 2014

श्री स. ना. गोयन्का द्वारा दस दिवसीय विपश्थना ध्यान विधि के विडियो लिंक ( हिन्दी में )

Vipassana Meditation Discourse - Day 03 (Hindi) विपश्यना प्रवचन हिन्दी में - दिवस ०३
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Vipassana Meditation Discourse - Day 04 (Hindi) विपश्यना प्रवचन हिन्दी में - दिवस ०४
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Vipassana Meditation Discourse - Day 05 (Hindi) विपश्यना प्रवचन हिन्दी में - दिवस ०५
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Vipassana Meditation Discourse - Day 06 (Hindi) विपश्यना प्रवचन हिन्दी में - दिवस ०६
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Vipassana Meditation Discourse - Day 07 (Hindi) विपश्यना प्रवचन हिन्दी में - दिवस ०७
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Vipassana Meditation Discourse - Day 08 (Hindi) विपश्यना प्रवचन हिन्दी में- दिवस ०८
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Vipassana Meditation Discourse - Day 09 (Hindi) विपश्यना प्रवचन हिन्दी में - दिवस ०९
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Vipassana Meditation Discourse - Day 10 (Hindi) [विपश्यना प्रवचन हिन्दी में- दिवस १० ]
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Vipassana Meditation Discourse - Day 11 (Hindi) [विपश्यना प्रवचन हिन्दी में- दिवस ११]
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Vipassana benefit of Dhamma Service

साभार : Avinash Chaudhari





















 

Monday, September 30, 2013

विपस्सना आचार्य दिंवगत सत्यनारायण गोयनकाजी को शत्‌-शत्‌ नमन

गोयन्का

                           आचार्य सत्य नारायण गोयन्का
                          जन्म : ३० जनवरी , १९२४
                          निर्वाण  : २९ सितम्बर, २०१३     

बाबा साहब के बाद अगर भारत मे बुद्ध धम्म की ज्योति को जलाये रखने मे किसी व्यक्ति का बहुत योगदान था तो वह थे आचार्य गोयन्का जी । उनका निधन बुद्ध धम्म के लिये एक बहुत बडी क्षति है । लेकिन जाना तो एक न एक दिन सब को है , हमारे चाहे या अनचाहे प्रकृति के इस नियम को कोई नही बदल सकता ।
चाहता हूँ , पुष्प यह
गुलदान का मेरे
न मुर्झाये कभी ,
देता रहे
सौरभ सदा
अक्षुण्ण इसका
रुप हो!
पर यह कहाँ संभव ,
कि जो है आज,
वह कल को कहाँ ?
उत्पत्ति यदि,
अवसान निशिचत!
आदि है
तो अंत भी है !
यह विवशता !
जो हमारा हो ,
उसे हम रख न पायें !
सामने अवसान हो
प्रिय वस्तु का,
हम विवश दर्शक
रहे आयें!
नियम शाशवत
आदि के,
अवसान के ,
अपवाद निशचय ही
असंभव-
शूल सा यह ज्ञान
चुभता मर्म में,
मन विकल होता!
प्राप्तियां, उपलबिधयां क्या
दीन मानव की,
कि जो
अवसान क्रम से,
आदि -क्रम से
हार जाता
काल के
रथ को
न पल भर
रोक पाता !
क्या अहं मेरा
कि जिसकी तृष्टि
मैं ही न कर पाता !

विपस्सना आचार्य सत्यनारायण गोयनकाजी ने बुद्धत्तर भारत के लुप्त हुई बुद्ध की अनमोल 'ध्यान' विधि और बुद्ध वाणी को अपनी एक-एक बूंद से प्रबल-प्रवाह से प्रवाहित किया। गहन अध्ययन और पद पद पर ठोकरे खाते हुए और उद्देश्य विचलित न होते हुए विपस्सना आचार्य सत्यनारायण गोयनकाजी ने सदा बुद्ध के सबल बाहु का अवलम्बन किया। जिनके गहन मैत्री का पूण्य प्रकाश है की भगवान बुद्ध के पुण्यसलिला भागीरथी ने देश और विदेश के करोड़ो लोगो को बुद्ध के सांस्कृतिक प्रवाह में बहाने के लिए साहस बंधाया। जिसे पाकर प्राचीन बुद्ध की ध्यान विधि और बौध्‍द इतिहास के निधि ने स्वयं अपूर्व वैभवशाली गौरव अपने खोये हुए भारत के धरती पर फिर से हासिल करके लोककल्याण किया और लोककल्याण की धारा प्रवाहीत हो रही है। विपस्सना आचार्य सत्यनारायण गोयनकाजी ने पदपद पर कष्ट भरे महासागर के तूफानी लहरों को चीरकर अपने ओजस्वी भाषा शैली में बुद्ध के धम्म को प्रस्तुत किया। आदरणीय विपस्सना आचार्य सत्यनारायण गोयनकाजी के निधन से विश्वजगत को क्षति  होने का आभास हुवा है। लेकिन आदरणीय विपस्सना आचार्य सत्यनारायण गोयनकाजी के स्नेहमयी ममतामयी गोद को विश्वजगत भूल नहीं सकता क्योंकि उनके सहस्त्र्भुजा प्रबल प्रवाह की पियुषपायिनी और बुद्ध के धम्म की जगकल्याणी तरंगे सदा साथ है!

भवतु सब मंगलं !
सबका मंगल हो !

साभार : सत्यजीत मौर्या 

यह भी देखे :

श्री स. ना. गोयन्का द्वारा दस दिवसीय विपश्थना ध्यान विधि के आडियो एवं पी.डी.एफ़. लिंक











































Saturday, June 22, 2013

श्री स. ना. गोयन्का द्वारा दस दिवसीय विपश्थना ध्यान विधि के आडियो एवं पी.डी.एफ़. लिंक

goenka

श्री स. ना. गोयन्का द्वारा विपश्थना ध्यान विधि पर उपदेश को यहाँ से डाऊनलॊड किया जा सकता है। हिन्दी भाषा में उपदेश को डाऊनलोड करने के लिये पृष्ठ की १४ वीं कडी को चुनें  । हिन्दी के अतिरिक्त यह मराठी , बंगाली, अंगेजी, कन्नड, मलयालम , पंजाबी, तेलेगु और तमिल भाषा में भी उपलब्ध है ।

यह प्रवचन PDF में भी उपलब्ध हैं , डाऊनलोड करने के लिये यहाँ जायें

10 Day Discourses - MP3 Audio Download

Publisher: Pariyatti Digital Editions

Product Type: MP3 Audio

Description

All eleven Dhamma discourses given by S.N. Goenka during a ten-day meditation course. Includes chanting from the closing session on Day 11. Available in more than 40 languages. Hindi and English are spoken by S.N. Goenka - other languages are translations.

These discourses are also available in a book, "Discourse Summaries of S. N. Goenka".

Saturday, September 8, 2012

जीवन जीने की कला – विपश्यना साधना

ध्यान प्रक्रियायों मे विपशयना ध्यान पद्द्ति भगवान बुद्ध द्वारा अन्वेषित प्रक्रिया सबसे अलग और तर्क और वैज्ञानिक सम्पत है । 

बुद्ध कहते थे ’ इहि पस्सिको’ - आओ और देख लो । मानने की आवशकता नही है । देखो और फ़िर मान लेना । विपशयना का अर्थ है शांत बैठकर , शवास को बदले बिना ..शवास के प्रति साक्षीभाव । जहाँ प्राणायाम मे शवास को बदलने की चेष्टा की जाती है वही विपशयना मे शवास जैसी है वैसे ही देखने की आंकाक्षा है ।

बुद्ध इसके लिये  किसी धारणा का आग्रह नही करते । और बुद्ध के देखने की जो प्रक्रिया थी उसका नाम है विपस्सना ।
विपसन्ना बहुत सीधा साधा प्रयोग है । अपनी आती जाती शंवास के प्रति साक्षीभाव । शवास सेतु  है , इस पार देह , उस पार चैतन्य और मध्य मे शवास है । शवास को ठीक से देखने का मतलब है कि अनिवार्य रुपेण से हम शरीर को अपने से भिन्न पायेगें । फ़िर शवास अनेक अर्थों मे महत्वपूर्ण है , क्रोध मे एक ढंग से चलती है दौडने मे अलग , आहिस्ता चलने मे अलग , अगर चित्त शांत है तो अलग और अगर तनाव मे है तो अलग । विपस्सना का अर्थ है शांत बैठकर , शवास को बिना बदले देखना । जैसे राह के किनारे बैठकर कोई राह चलते यात्रियों को  देखे , कि नदी तट पर बैठ कर नदी की बहती धार को देखे । आई एक तरगं तो देखोगे और नही आई तो  भी  देखोगे   । राह पर निकलती कारें , बसें तो देखोगे नही तो नही देखोगे । जो भी है जैसा भी है उसको वैसे ही देखते रहो । जरा भी उसे बदलने की कोशिश न करें । बस शांत  बैठकर शवास को देखो । और देखते ही देखते शवास और भी अधिक शांत हो जाती है क्योंकि देख्ने मे ही शांति है ।

हिन्दी मे ध्यान पर बहुत ही कम वीडियो उपलब्ध हैं । Meditation Techniques in Hindi  यू ट्यूब पर उपलब्ध है , मूलत:Spiritual Reality –journey withinका हिन्दी अनुवाद है । न सिर्फ़ यह विपशयना के बारे मे आपको बतायेगा बल्कि और भी ध्यान पद्द्तियों से भी रुबरु करायेगा । य टूयूब पर सीधे देखने के लिये http://youtu.be/L4thsq2m0ic पर क्लिक करें ।

Sunday, July 18, 2010

विपश्यना साधना – पहला दिन ( Vipassana meditation Discourse No. 1 )

आचार्य श्री सत्य नारायण गोयन्काजी के इन अमूल्य वचनों की तलाश मुझे कई दिनों से थी । दस दिनों तक चलने वाले शिविरों  मे अपना समय निकालना एक समस्या लगती है । कल जब इन वीडियो को मेगाअपलोड पर देखा तो इनको सब के  साथ बाँट देने का लोभ छॊड न पाया ।

 

Discourse No 1 : http://www.megaupload.com/pt/?d=MO6WJEP8

Thursday, February 5, 2009

Open Space

मुक्त आकाश की परिकल्पना क्या हम अपने साथ नही कर सकते ? क्यूं हम इतनी अधिक पीडओं से गुजरते हैं , उनको अपनी जिंदगी का अह्म हिस्सा बना लेते हैं और फ़िर उनको छोडना हमारे लिये नामुनिकन सा हो जाता है । मन जिस को एक तरफ़ अस्वीकृत करता है उसकी न सुनते हुये हम उन कडवाहटॊ को न सिर्फ़ अपनाते हैं बल्कि अपने को हानि भी पहुँचाते रहते हैं ।

लेकिन इस चाल को नम्रता और अभ्यास से मुक्त भी कर सकते हैं । बजाय इसके कि इन कड्वाहटॊं  के  विरुद्ध संधर्ष करें हम जागृत होकर इन परिस्थितियों से बखूबी निजात पा सकते हैं क्योंकि हर इन्सान मे मुक्त आकाश की जगह अवशय है , बस देर है  जागृत होकर  उसको    तलाशने   की ।

It is never too late for any of us to look at our minds. We can always sit down and allow the space for anything to arise. Sometimes we have a shocking experience of ourselves. Sometimes we try to hide. Sometimes we have a surprising experience of ourselves. Often we get carried away. Without judging, without buying into likes and dislikes, we can always encourage ourselves to just be here again and again and again.

The painful thing is that when we buy into disapproval, we are practicing disapproval. When we buy into harshness, we are practicing harshness. The more we do it, the stronger these qualities become. How sad it is that we become so expert at causing harm to ourselves and others.

The trick then is to practice gentleness and letting go. We can learn to meet whatever arises with curiosity and not make it such a big deal. Instead of struggling against the force of confusion, we could meet it and relax. When we do that, we gradually discover that clarity is always there. In the middle of the worst scenario of the worst person in the world, in the midst of heavy dialogue with ourselves, open space is always there.

Pema Chodron, from "When Things Fall Apart"

Source: Mindfulness Meditation Course 

Tuesday, January 27, 2009

अब तिपिटक आफ़लाइन भी उपलब्ध (New Desktop client for the Pali Tipitaka)

tip

तिपिटक  को आन लाइन और आफ़लाइन दोनो ही तरह से पढ सकते हैं । आनलाइन देखने के लिये यहाँ किल्क करें और कम्पयूटर पर आफ़लाइन पढने के लिये यहाँ पर किल्क करके डाउनलोड करें ।

Now the Pāli Tipitaka is  available online & offline in various scripts. Click here for instructions on downloading and installing the desktop version for the offline mode.